आर्य समय संवाददाता,जबलपुर। आगनबाड़ियों में पढ़ने वाले मसूमों को उचित पोषण मिल सके। इसके लिए शासन पोष्टिक भोजन का वितरण कराता है। भोजन वितरण के लिए बकायदा मेन्यू भी निर्धारित किया गया है। लेकिन जमीन हकीकत यह कि बच्चों के पोषण आहार के नाम बच्चों को छोटी-छोटी कटोरियों में दाल चावल बांटा दिया जाता है।
इस बात का खुलासा हालही ग्राम पंचायत घाना में हुआ। जब ग्राम पंचायत के सरपंच ने आंगनबाड़ी केंद्रो में जाकर खुद वस्तु स्थिति देखी। जिसके बाद पंचनामा तैयार कर मुख्य कार्यपालन अधिकारी जनपद पनागर को भेजा गया है। उक्त निरीक्षण का वीडियों भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।
ग्राम पंचायत घाना के सरंपच सुनीता रजक ने बताया कि आगनबाड़ी केंद्रो में बच्चों को बांटे जाने वाले खाने में गोलमाल होने की लंबे समय से शिकायत मिल रही थी। जिसको संज्ञान में लेते हुए आगनवाड़ी केंद्र 220 व एक अन्य केंद्र का औचक निरीक्षण करने पर पाया गया कि बच्चों को निर्धारित मेन्यू के तहत भोजन नही दिया जा रहा है।
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आगनवाड़ी केंद्र में भोजन वितरण की व्यवस्था जिस समूह के हाथों में है वह लगातार लापरवाही बरत रहा है। निरीक्षण के दौरान पाया गया कि जिस केंद्र में 40 बच्चें पंजीकृत है वहां महत सात- कटोरियों में दाल-चावल वितरित किया जा रहा है। ऐसे में सवाल उठता है कि समूह को आवंटित होने वाला अनाज आखिर जा कहा रहा हैं।
नियम के तहत सांझा चूल्हा अंतर्गत समूह को निर्धारित की गई आगनवाड़ी केंद्र में ही भोजन पकाना होता है। लेकिन इस नियम का भी पालन नहीं किया जा रहा है। समूह के कर्ताधर्ता घर से भोजन पका कर लाते हैं और ठंडा खाना बच्चों को परोसा जाता है।
सरपंच सुनीता रजक ने बताया कि यहां 20 वर्षो से परवीन बेगम नामक महिला समूह का संचालन करती चली आ रही हैं। पड़ताल में यह बात सामने आयी है कि वे अपने घर से ही खाना पकाकर लाती हैं। निरीक्षण के दौरान ग्राम पंचायत घाना के पंच व सचिव भी मौजूद थे।

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