बलौदाबाजार- सर्व आदिवासी समाज ने मणिपुर में आदिवासी समाज की युवती के साथ गैंगरेप की घटना सहित एसटी जाती प्रमाण पत्र के सहारे प्रदेश के विभिन्न विभागों में नौकरी कर रहें लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर राज्यपाल के नाम नायब तहसीलदार कसडोल को ज्ञापन सौंपा है, ज्ञापन में सर्व आदिवासी समाज ने कहा कि मणीपुर में आदिवासीओ के साथ हो रहे क्रूरता की सीमा लांघ दी गई, आदिवासी मां-बहनों को निर्वस्त्र कर घूमाया जा रहा है, उसके साथ गैंगरोप किया गया, उसके परिवारजनों की हत्या कर दी गई है और इन सब घटनाओं के बाद भी वहां की स्थानीय शासन प्रशासन हाथ बांधे बैठी है। घटना के 84 दिन बीत जाने के बाद भी दरिंदगी करने वाले खुलेआम घूम रहे हैं, राज्य सरकार उनके खिलाफ कार्यवाही करना तो दूर की बात, इस घटना से भी अनभिज्ञता जाहिर करना, मानवता के लिए शर्म की बात है।


इसके अलावा सर्व आदिवासी समाज ने कहा कि प्रदेश में सन् 2000 से 2020 तक सामान्यः प्रशासन विभाग में 758 ऐसे अधिकारी व कर्मचारी का शिकायत प्राप्त हुआ था, जो एस.टी. का फर्जी जाति प्रमाण पत्र बनवाकर सरकारी पदों पर नौकरी कर रहें है । सामान्य प्रशासन के द्वारा 659 मामलों के जांच उपरान्त 267 ऐसे मामले जो पूर्णतः एस.सी. व एस.टी. का फर्जी जाति प्रमाण पत्र बनवाकर विगत कई वर्षों से छत्तीसगढ़ में बड़े अधिकारी व कर्मचारी बने हुए है। सर्व आदिवासी समाज के द्वारा इन फर्जी जाति प्रमाण पत्र धारियों के खिलाफ अपराधिक कार्यवाही करने एवं आज तक के प्राप्त इनके वेतन भत्तों की वसूली करने के लिए कई बार ज्ञापन, आंदोलन कर चुका है। साथ ही सामान्य प्रशासन विभाग के द्वारा चिन्हित ऐसे 267 फर्जी अधिकारी व कर्मचारियों के खिलाफ सर्व आदिवासी समाज बार-बार कार्यवाही की मांग करता रहा है। ऐसे में सोये हुए शासन प्रशासन को जगाने के लिए विगत दिनों राजधानी रायपुर में एस.सी. /एस.टी. के युवाओं क द्वारा नग्न प्रदर्शन किया गया था। शासन द्वारा इन युवाओं को गिरफ्तार कर इनके खिलाफ कार्यवाही की जा रही है। अतः सर्व अधिकारी समाज एस.सी. व एस.टी. प्रदर्शनकारी युवाओं के निःशर्त रिहाई की मांग करता है और फर्जी प्रमाण पत्र धारी अधिकारी/कर्मचारी को 2127 बर्खास्त कर आपराध पंजीबद्ध कर कार्यवाही करने की मांग किया गया है।