आर्य समय संवाददाता, जबलपुर।  पुलिस महानिदेशक ने बताया कि भारत सहित विश्व के अधिकांश देश पूरी तरह से ऑनलाइन बैंकिंग से ही चल रहे हैं। साइबर अपराधी 3 श्रेणियों में अपराध करते हैं, जिसमें व्यक्ति विशेष, संपत्ति और सरकार के विरु द्ध अपराध शामिल हैं। साइबर अपराध में हैकिंग, रैंसमवेयर, साइबर बुलिंग, ऑनलाइन धोखाधड़ी जैसी अवैध गतिविधियां शामिल हैं। जो लोग साइबर अपराध या इसी तरह की गतिविधियों में शामिल होते हैं उन्हें हैकर, स्कैमर्स या धोखेबाज कहा जाता है।

श्रीराम इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी पहुंचे आईपीएस वरूण कपूर ने बताया कि साइबर अपराध एक ऐसा अपराध है जो कम्प्यूटर और नेटवर्क के माध्यम से किया जाता है। इसमें गतिविधियों की विस्तृत श्रृंखला जैसे गैरकानूनी रूप से किसी की निजी जानकारी प्राप्त करना, जानकारी मिटाना, उसका गलत इस्तेमाल करना, उसमें फेरबदल करना, ऑनलाइन बैंक खातों से पैसे चुराना आदि शामिल है। साइबर अपराधियों से सतर्क और अलर्ट रहना ही सबसे सुरक्षित एवं आसान तारीका है। निजी व जरूरी जानकारी साझा नहीं करेंगे, तो कोई साइबर ठग आपको चूना नहीं लगा सकता है।  

 साइबर क्राइम को लेकर है अनेक चुनौतियां-

पुलिस को यह पता नहीं होता कि साइबर अपराधी कहां बैठकर अपराध कर रहा है। इस अपराध के कोई भौतिक फुटप्रिंट नहीं आते हैं। डिजिटल फुटप्रिंट पर पहुंचकर भी कई बार पुलिस असफल रहती है। साइबर अपराधी नए-नए तरीकों से अपराध कर रहे हैं। हम उपलब्ध तकनीक की मदद और जनता में जागरूकता फैलाकर ही बचाव का कार्य कर सकते हैं। अनजान लोगों से ऑनलाइन दोस्ती न करे, इससे ब्लैकमेल होने से बचा जा सकता है। छात्रों ने स्पेशल डीजी से कई सवाल भी किए, जिसका उन्होने समुचित जवाब देते हुए समाधान बताया है।  

 इस तरह होती है ऑनलाइन ठगी-

अनजान व्यक्ति आपको कॉल/मैसेज कर लुभावना ऑफर देता है, किसी सर्विस के ब्लॉक होने का भय दिखाता है, ऑनलाइन खरीदारी या व्यक्तिगत जानकारी देकर आप को विश्वास में लेता है और इस तरीके से लोग ठगी एवं साइबर अपराध का शिकार हो जाते हैं। किसी भी सूरत में अनजान कॉलर से अपने फोन पर बैंक से जुड़ी निजी जानकारी आधार का नंबर या पैन कार्ड की जानकारी एटीएम का ओटीपी कतई साझा ना करें।