आर्य समय संवाददाता, जबलपुर। यातायात नियमों के मुताबिक माल वाहक वाहन में सवारी बैठाना गलत है, इसके बावजूद लोडिंग वाहनों में इंसानों की ओवर लोडिंग का सिलिसला थमने का नाम नहीं ले रहा है। पूर्व में जिले में कई हादसे भी हो चुके हैं, जिसमें कई लोगों ने अपनी जान भी गंवा दी है। बुधवार दोपहर बरेला के काशी महगवां के पास 30 यात्रियों से भरा पिकअप वाहन स्टेरिंग फेल हो जाने की वजह से अनियंत्रित होकर खाई में गिर गया। हादसे में एक यात्री की मौके पर मौत हो गई, वहीं 2 लोगों की जान उपचार दौरान चली गई। दर्दनाक हादसे में 3 लोगों की असमय मौत हो गई, 27 यात्री घायल हुए जिनका उपचार अलग-अलग स्थानों में चल रहा है। मेडिकल अस्पताल में भर्ती 2 दर्जन घायलों में एक की हालत बेहद नाजुक बताई जा रही है, घायलों में बच्चे भी शामिल हैं।

सालीवाड़ा निवासी राजकुमार नरेती ने बताया कि ऐंठाखेड़ा से बरेला के चिरई पानी गांव एक युवक की सगाई कार्यक्रम में जा रहे थे। काशी महगवां में वाहन का स्टेरिंग फेल हो जाने के कारण वाहन पलट गया। पिकअप वाहन में छोटे बच्चों सहित करीब 30 लोग सवार थे।

मृतक मेर सिंह कुलस्त निवासी सालीवाड़ा,  हिरौंदा बाई निवासी धाधरा खुर्शी और रामेश्वर मरावी निवासी ऐंठा रामपुर हैं। हादसे में संजय मरावी, आरती बाई, चंद्रवती बाई, जिगर बरकड़े, विजय सिंह, ऋतिक बरकड़े, हीरालाल मरावी, मालती मरावी, सुमंत्री बाई, धर्मेंद्र सिंह बरकड़े, जसोदा बाई, रोशनी बरकड़े, चगुनिया बाई मरावी, शंकरा बाई, रघुवीर मरावाी, चेताबाई, सुनीता मरावी सहित अन्य घायल हैं।

जान से खिलवाड़ कर रहे वाहन मालिक-
पारिवारिक कार्यक्रम के साथ-साथ खेत में कार्य कराने के लिए वाहन मालिक और ठेकेदार गरीबों की जान से खिलवाड़ कर रहे हैं। बरेला, कटंगी, मझौली, शहपुरा से लेकर पाटन तक सड़कों पर मजदूरों से भरे ट्रेक्टर सहित अन्य लोडिंग वाहन बेधड़क चल रहे हैं।

पिकअप एवं आटो में महिला-पुरूष सहित नाबालिगों को भरकर खेतों तक पहुंचाया जा रहा है। मजदूरों से भरे लोडिंग वाहन थाना और पुलिस चौकी के सामने से गुजर जाते हैं, लेकिन इन्हें रोकने या समझाइश देने वाला कोई नहीं है। ग्रामीण क्षेत्र में इस बात की चर्चा है कि किसी दिन फिर कोई बड़ा हादसा हो गया, तो इसका जिम्मेदार कौन होगा। सुबह और शाम के समय सड़कों में मजदूरों से वाहनों का आवागमन बड़ी संख्या में होता है। हादसे होने के कुछ दिन तक वाहनों पर लगाम लगी रहती है, फिर समय गुजरने के बाद लापरवाही शुरू हो जाती है।