अनमोल संदेश, पठारी
कभी प्राकृतिक जल स्रोत जीवन के आधार बने हुए थे। अब आधे से ज्यादा जल स्रोतों ने दम तोड़ दिया है। शेष बचे जल स्रोत अपने अस्तित्व की जंग लड़ रहे हैं। आधुनिक कृत्रिम जल स्रोत लगातार बढ़ती गर्मी के आगे बौने साबित हो रहे हैं। जल संरक्षण के प्रति लापरवाह ग्राम भीषण जल संकट की गिरफ्त में आ गया है। जिससे मुक्ति के लिए नई परियोजना की आवश्यकता है। जिस ओर शासन-प्रशासन और नागरिक गंभीर नजर नहीं आ रहे है। जो चिंता का विषय है। पठारी क्षेत्र के अनेक ग्राम जो पहाडिय़ों पर एवं पथरीली जगह में बसे हुए हैं वह ग्राम जल संकट की चपेट में आने लगे है। प्राकृतिक जल स्रोत, ग्राम पंचायत की नल जल योजना, पीएचई और निजी नलकूपों ने भी साथ छोडऩा शुरू कर दिया है।

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