आर्य समय संवाददाता, जबलपुर। डिफेंस इस्टेट ऑफिस, केंट बोर्ड व आर्मी क्यूआरटी की टीम ने संयुक्त कार्यवाही करते हुए मंगलवार की दोपहर पांच हजार वर्ग फुट रक्षा भूमि में निर्माणाधीन भवन को धराशाई कर दिया गया।  यह पूरी कार्यवाही डिफेंस इस्टेट ऑफिसर नेहा गुप्ता की मौजूदगी में अंजाम दी गई। डिफेंस इस्टेट ऑफिसर का कहना था कि भवन निर्माण अवैध तरीके से हो रहा था। वहीं जमीन की खरीद फरोख्त भी अवैधानिक तरीके से हुई है। 

डिफेंस इस्टेट ऑफिसर ने बताया कि केंट जीएलआर सर्वे क. 88 जिसका रकबा 2.70 एकड़ है। जिसे बंगला नंबर 2 नर्मदा रोड के नाम से जाना जाता है। उक्त ओल्ड ग्रांट सम्पत्ति है जिसका स्वामित्व भारत सरकार का है‌। पिछले दिनों सरदार अमरजीत सिंह खुल्लर (खुलार) से बंगला नं. 2 की 1182 वर्गफुट जमीन जिसमें से 200 वर्गफुट पर टिन शेड का कच्चा मकान बना हुआ है।

अवैध तरीके से उसे बेच दिया था‌। इसी तरह मनपाल कौर से बंगला नं. 2 की 3000 वर्गफुट जमीन जिसमें से 500 वर्गफुट पर टिन शेड का कच्चा मकान बना हुआ था। उसका विक्रय कर दिया। उक्त दोनों ही विक्रेता (सरदार अमरजीत सिंह खुल्लर एवं मनपाल कौर) उक्त सम्पत्ति के वैध मालिक नहीं है और न ही भारत सरकार के स्वामित्व की ओल्ड ग्रांट की शर्तों के तहत दी गई सम्पत्तियों को बगैर सक्षम प्राधिकारी की अनुमति के क्रय-विक्रय किया जा सकता है। अतः उक्त क्रय-विक्रय पूर्णतः अवैध रूप से हुआ था। लेकिन इस बात की जानकारी विभाग द्वारा दिए जाने के बाद भी क्रेता शर्मा परिवार द्वारा निर्माण कराया जा रहा था। लिहाजा मंगलवार को निर्माण कार्य रूकवाते हुए किए निर्माण को तोड़ दिया गया है।

आवेदन करके फंस गया -

बताया जाता है कि जमीन की खरीद फरोख्त 27 सितंबर 2023 को हुई थी। विक्रेता खुरल दंपती ने बकायदा उपपंजीयक कार्यालय जाकर रजिस्ट्रेशन करा था। लेकिन पूरा मामला जब खुल गया जब क्रेता निशांत शर्मा ने डिफेंस इस्टेट ऑफिस पहुंच आवेदन लगाते हुए निर्माण की अनुमति मांगी। जांच में रक्षा भूमि के विभाजित कर बेचने के खेल का खुलासा हो गया।

https://youtu.be/9b009gtaUFE