आर्य समय संवाददाता,जबलपुर। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल और छतरपुर से गए दो हज यात्री की मक्का में पड़ रही भीषण गर्मी से मौत हो गई है। वही जबलपुर से गए एक हज यात्री का 14 जून के बाद से परिवार वालों से संपर्क नहीं हो पा रहा है। जिसके बाद परेशान परिजन ने शुक्रवार की शाम कलेक्टर दीपक सक्सेना से मुलाकात कर मदद की गुहार लगाई। जबलपुर के गोहलपुर में रहने वाले 62 वर्षीय हाजी इसरार अहमद अंसारी 4 जून को जबलपुर से मक्का गए थे। 15 जून को अंतिम बार रात दो बजे इसरार अहमद अंसारी ने अपने बेटे से फोन पर बात की इसके बाद से फिर संपर्क नहीं हुआ। इसरार अहमद अंसारी की मिसिंग रिपोर्ट आने के बाद से परिवार परेशान है।
15 जून के बाद जब दो दिन तक पिता से बात नहीं हुई तो जबलपुर में परिवार परेशान हो गया। इसरार अहमद के बेटे अजीम अहमद ने 17 जून को जब पिता के नंबर पर कॉल किया को फोन किसी और ने उठाया। उन्होंने बताया कि इसरार अहमद जी की तबियत खराब हो गई है। जब उन्हें अस्पताल ले जाया जा रहा था,तब उनके जेब से मोबाइल नीचे गिर गया था। इसरार अहमद के विषय में जानकारी देने वाला व्यक्ति कर्नाटक के रहने वाले थे, जिनका नाम तस्लीम जमील है। पिता के गायब होने की जानकारी जैसे ही अजीम अहमद को लगी तो वो परेशान हो गए।
मक्का ले जाने वाले इंचार्ज फाजिल कैफ से जब इसरार के बेटे ने फोन पर बात की तो उन्होंने बताया कि सऊदी अरब सरकार की तरफ से मृतकों की जो लिस्ट जारी की गई है। उसमें इसरार अहमद का भी नाम है।
गोहलपुर में रहने वाले इसरार अहमद अंसारी के बेटे अजीम अहमद ने बताया कि 4 जून से लेकर 15 जून तक रोजाना अब्बा से बात होती रही, पर अचानक ही 15 जून के बाद से संपर्क टूट गया। पिता से जब बात नहीं हुई तो उन्हें मक्का ले जाने वाले एजेंट से बात की तो उन्होंने बताया कि उन्हें तलाश किया गया पर जब वह नहीं मिले। तो सऊदी अरब सरकार को मिसिंग की जानकारी दी गई। अब यह बताया जा रहा है कि उनकी मौत हो गई है। अजीम अहमद का कहना है कि ना ही वीडियो कॉल पर अब्बा की बॉडी दिखाई जा रही है और ना ही फोटो दिखाई जा रही है।
जबलपुर के 220 हाजियों के इंचार्ज फाजिल कैफ भी पिता की जानकारी जुटाने में नाकाम है। उनका कहना है कि जिस जगह पर बॉडी रखी हुई है, वहां पर सैकड़ों शव है। जहां पर जाने नहीं दिया जा रहा है। अजीम अहमद का कहना है कि कई तरह की अफवाह चल रही है, पर जब तक अपनी आंखों से पिता की बॉडी को नहीं देख लेते,तब तक विश्वास नहीं होगा कि उनकी मौत हो गई है।
नामनी से मांगी एनओसी-
इसरार अहमद अंसारी जब हज पर मक्का जा रहें थे, उस दौरान नामनी उनके बेटे अजीम अहमद अंसारी को बनाया गया था। हाजियों को लेकर मक्का गए फाजिल कैफ ने अजीम अहमद से एनओसी मांगी है। उनका कहना है कि एनओसी के बाद ही इसरार अहमद को दफनाया जाएगा। वहीं दूसरी तरफ इसरार अहमद के परिवार वाले इसके लिए तैयार नहीं है कि बिना बॉडी देखे ही ये मान लिया जाए कि उनकी मौत हो गई है। अजीम अहमद का कहना है कि पिता के साथ रिश्तेदार भी गए है। पर उन्हें ना ही अस्पताल जाने दिया गया और ना ही अब यह बताया जा रहा है कि बॉडी कहां है। इसलिए जब तक अपनी आंखों से शव को नहीं देख लेते तब तक एनओसी नहीं दी जाएगी। इसरार अहमद के साथ उनके बड़े भाई,बड़ी भाभी के अलावा 15 से 20 लोग हज पर मक्का गए हुए है। पीड़ित परिवार ने जबलपुर प्रशासन से भी मदद की गुहार लगाई है।

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