आर्य समय संवाददाता,जबलपुर। रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय (rdvv) में 17 सूत्रीय मांगों को लेकर गत् 30 दिसंबर से कर्मचारी अनुसूचित जाति जनजाति एवं पिछड़ा वर्ग कर्मचारी संघ के बैनर तले अनशन पर बैठे हुए थे। मंगलवार की शाम अचानक विश्वविद्यालय प्रशासन ने कर्मचारी संघ चुनाव कराने की दिशा में कदम बढ़ाते हुए निर्वाचन अधिकारी प्रो. पीके खरे को नियुक्ति कर दिया। जिसके बाद कर्मचारी राजनीति में गर्माहट आ गई। इधर,पत्र मिलते ही अनुसूचित जाति जनजाति एवं पिछड़ा वर्ग कर्मचारी संघ अध्यक्ष ने आदर्श आचार संहिता लागू होने का हवाला देते हुए अनशन स्थगित करने की घोषणा कर दी। लेकिन अनशन में उनका सहयोग कर रहे अन्य कर्मचारी उनके इस निर्णय से सहमत नहीं हैं। लिहाजा उन्होने ने घोषणा कर दी कि जब तक श्रमसाध्य का भुगतान सहित अन्य मांगों पर ठोस निर्णय नहीं होता वे अनशन जारी रखेंगे।
अनुसूचित जाति जनजाति एवं पिछड़ा वर्ग कर्मचारी संघ अध्यक्ष अजय झारिया ने बताया कि रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय जबलपुर एवं जागरूक कर्मचारियों का 30 दिसंबर से प्रारंभ धरना प्रदर्शन अनशन नवमें दिन मंगलवार को सायं उन्होंने ने स्थगित कर दिया है। विश्वविद्यालय द्वारा अधिसूचना जारी की गई। जिसमें प्रो.पीके खरे को शैक्षणैत्तर कर्मचारी संघ का चुनाव अधिकारी नियुक्त किया गया है। अधिसूचना उपरांत कर्मचारियों हेतु चुनाव आदर्श आचार संहिता लग गई है।
वहीं धरने में सहयोग कर रहे जागरूक कर्मचारियों के गुट के संजय यादव ने कहा कि अनशन केवल चुनाव अधिकारी बनाए जाने से स्थगित नहीं किया जा सकता है। हमनें 17 सूत्रीय मांगे विश्वविद्यालय प्रशासन के समक्ष रखी थी। जिसमें श्रमसाध्य भुगतान सहित अन्य मांगे काफी महत्वपूर्ण थी। मुख्य रूप से 70 पदों के निरस्त किए जाने से कर्मचारियों के भविष्य को लेकर खड़ी हुई समस्याओं का स्थाई निदान भी शामिल था। लेकिन विश्वविद्यालय प्रशासन कर्मचारियों को लेकर गंभीर नहीं है। इसलिए मजबूरन हमें अपने आंदोलन को आगे बढ़ाना पड रहा है।

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