आर्य समय संवाददाता,जबलपुर। रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय (RDVV) के 36वें दीक्षांत समारोह में 21 जून को मुख्य अतिथि के तौर पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू शामिल होने जा रही हैं। लेकिन प्रोटोकॉल के चलते एक विवाद खड़ा हो गया है। राष्ट्रपति भवन ने कुल गोल्ड मैडलिस्ट छात्र-छात्राओं में से केवल 20 को ही मंच पर आने की अनुमति प्रदान की है। जिसके चलते छात्रों में काफी आक्रोश है। अब प्रोटोकॉल के चलते बनी स्थिति से निपटने विश्वविद्यालय प्रशासन बीच का रास्ता निकाला है।

विश्वविद्यालय प्रशासन ने कार्यक्रम का विस्तार करते हुए उसे दो चरणों में बांट दिया है। पहले चरण के दीक्षांत समारोह में राष्ट्रपति, राज्यपाल और मुख्यमंत्री की उपस्थिति में पदक वितरण किया जाएगा। वहीं दूसरे चरण में प्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार के हाथों विद्यार्थियों को डिग्री व पदक वितरित कराएं जाएंगे।

उल्लेखनीय है कि गुरूवार को दीक्षांत समारोह की रिहर्सल के दौरान जैसे ही पता चला कि स्वर्ण पदक के प्राप्त करने वाले 141 छात्र-छात्राओं में से केवल 20 को ही राष्ट्रपति के हाथों गोल्ड मैडल मिलेगा, विद्यार्थियों का गुस्सा फूट पड़ा। कुलगुरु कार्यालय के बाहर विवाद की स्थिति निर्मित हो गई। उनका कहना था कि केवल 20 विद्यार्थियों का चयन कर शेष स्वर्ण पदकधारियों को मंचीय सम्मान से वंचित करना भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14 में निहित समानता के सिद्धांत की भावना के विपरीत है।

कुलगुरु कार्यालय के बाहर अपनी आपत्ति दर्ज कराते हुए डॉ. दिव्या चौबे, डॉ. सुप्रिया अम्बर, डॉ. श्वेता तिवारी, डॉ. समिति शास्त्री, प्रियांशी कौरव, संजय पाटकर सहित अनेक शोधार्थी, स्वर्ण पदकधारी एवं अन्य विद्यार्थी का कहना था कि यह किसी व्यक्तिगत सम्मान का नहीं, बल्कि विश्वविद्यालय के प्रत्येक मेधावी विद्यार्थी के समान अधिकार और सम्मान का प्रश्न है।

दीक्षान्त समारोह में विश्वविद्यालय के 141 छात्र-छात्राओं को 240 स्वर्ण पदक, 182 विद्यावारिधि (पी एच डी), 03 विद्यावाचस्पति (डी लिट) एवं 1 डीएससी उपाधि एवं 1 मानद उपाधि प्रदान किया जाना प्रस्तावित है।