आर्य समय संवाददाता, जबलपुर। जबलपुर में स्वाइन फ्लू से ग्रसित मरीजों के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। स्वाइन फ्लू के मरीजों के सामने आने के बाद स्वास्थ्य अमला भी अलर्ट मोड में आ गया है।
जानकारी के मुताबिक एच-एन-1 वायरस (स्वाइन फ्लू) के करीब 11 मरीज नेताजी सुभाष चंद्र बोस मेडिकल कॉलेज-अस्पताल सहित निजी अस्पतालों में भर्ती हैं। वहीं 10 ऐसे मरीज जिनमें स्वाइन फ्लू के लक्ष्ण नजर आ रहे थे, उनके सेंपल लिए गए हैं।
सीएमएचओ डॉ संजय मिश्रा ने बताया कि स्वाइन फलू रोगी को आइसोलेशन वार्ड में भर्ती किया जाता है। पूर्व में केवल नेताजी सुभाष चन्द्र बोस मेडिकल कॉलेज-अस्पताल में आइसोलेशन वार्ड था, अब निर्धारित मापदंड के आधार पर निजी अस्पतालों में भी आइसोलेशन वार्ड बन गये है। लिहाजा संक्रमित व्यक्ति निजी अस्पतालों में भी भर्ती हैं। स्वाइन फ्लू को लेकर दहशत का माहौल न बने इसलिए स्वास्थ्य अमला मरीजों को लेकर पूरी एहतियात बरत रहा है।
उल्लेखनीय है कि
2009-10 के फ्लू सीजन के दौरान, एक नया एच-1 एन-1 वायरस मनुष्यों में बीमारी का कारण बनने लगा। इसे अक्सर स्वाइन फ्लू कहा जाता था और यह इन्फ्लूएंजा वायरस का एक नया संयोजन था जो सूअरों, पक्षियों और मनुष्यों को संक्रमित करता था। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने 2009 में एच1एन1 फ्लू को महामारी घोषित किया था। लेकिन महामारी से निकला एच1एन1 फ्लू स्ट्रेन मौसमी फ्लू का कारण बनने वाले स्ट्रेन में से एक बन गया। फ्लू से पीड़ित अधिकांश लोग अपने आप ठीक हो जाते हैं। लेकिन फ्लू और इसकी जटिलताएं जानलेवा हो सकती हैं। खासकर उन लोगों के लिए जो उच्च जोखिम में हैं मतलब पूर्व से किसी गंभीर बीमारियों से ग्रस्ति हो।
स्वाइन फ्लू के सामान्यता: जो लक्ष्ण बताए गए हैं उसके तहत मरीजों को बुखार (लेकिन हमेशा नहीं),मांसपेशियों में दर्द,ठंड लगना और पसीना आना,खांसी,गला खराब होना,बहती या भरी हुई नाक,पानी भरी या लाल आँखें,आँख का दर्द, शरीर में दर्द,सिरदर्द,थकान और कमजोरी,दस्त,पेट में दर्द,उल्टी होना आम है। लेकिन यह वयस्कों की तुलना में बच्चों में अधिक आम है। फ्लू के लक्षण वायरस के संपर्क में आने के लगभग 1 से 4 दिन बाद विकसित होते हैं।

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