आर्य समय संवाददाता,जबलपुर नेताजी सुभाष चंद्र बोस मेडिकल कॉलेज अस्पताल में बीती रात गायनिक विभाग में उस समय अफरा-तफरी मच गई जब करीब साढे 10 बजे के लगभग एक रुम में चारो ओर आग और धुंआ उठने लगा और देखते ही देखते बाहर परिसर तक धुंआ के पहुंचने से यहां लोग घबरा गए। जैसे ही अस्पताल प्रबंधन को जानकारी लगी तत्काल प्रशासनिक अधिकारी अस्पताल पहुंच गए थे। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि अचानक धुंए के कारण लोग घबरा गए थे। मालूम हो कि गायनिक विभाग में सभी महिला मरीज भर्ती रहते हैं जो कि बहुत ही संवदेनशील क्षेत्र कहलाता है। कोई यह नहीं बता पा रहा था कि आखिर यह धुंआ और आग कैसे फैली। बाद में पता चला कि यहां एक सेन्शन मशीन रखी थी जो कोई चालू करके चला गया था। और उसे बंद करना भूल गया था जिसके कारण धूंआ उठने लगा। बाद में उसे बंद करके स्थिति नियंत्रण में की गई।

दो माह पहले भी लग चुकी आग

मेडिकल कॉलेज में करीब दो माह पहले ही आक्सीजन की केबिल में आग लगने के कारण उस समय भी अफरा-तफरी मच गई थी। जिस पर तत्काल काबू किया गया था। सूत्रों का कहना है कि उस समय भी किसी कर्मचारी की लापरवाही की वजह से यह हादसा हुआ था। लेकिन आज तक उसकी कोई इंक्वायरी नहीं हुई।

बीते साल भी हीटर जला छोड़ डॉक्टर छोड़ गए थे

बीते साल गर्मी के दिनों में भी एक वार्ड में ड्यूटी डॉक्टरों द्वारा एक हीटर जला छोड़ डॉक्टर छोड़ गए थे। वहां पुराने कपड़े पड़े थे जिससे आग फैल गई थी। और वह भी समय रहते बड़ा हादसा टल गया।  

60 साल बाद भी नहीं स्थापित हुआ फायर स्टेशन

हैरत की बात तो यह है कि संभाग के सबसे बड़े अस्पताल को बने करीब 60 साल से ज्यादा हो चुके हैं लेकिन आज तक फायर स्टेशन नहीं बन पाया है जबकि यहां पर आए दिन हादसे होते रहते हैं।

सुपरस्पेशलियटी नई बिल्डिंग में फायर स्टेशन

लोगो का कहना है कि सुपरस्पेशलियटी की नई बिल्डिंग में फायर स्टेशन बना हुआ है जबकि इस बिल्डिंग के निर्माण हुए अभी 6-7 साल हुए होंगे। जबकि पुरानी बिल्डिंग में सबसे ज्यादा भीड़ आती है ऐसी स्थिति में यहां पर फायर स्टेशन का बना होना बहुत आवश्यक है।

डॉ अरविंद शर्मा, अधीक्षक, मेडिकल कॉलेज अस्पताल ने बताया कि बीती रात सेन्शन मशीन में क्वाइल जलने के कारण धुंआ निकला था।  जैसे ही जानकारी लगी में स्वंय जाकर देखा। मरीजों को भी समझा दिया था कि चिंता की कोई बात नहीं है।