आर्य समय  संवाददाता, जबलपुर। शासकीय महाविद्यालय में अध्यनरत छात्राओं के मोबाइल पर अश्लील वीडियो भेजकर वायरल करने की धमकी देते हुए रुपयों की मांग करने वाले ब्लैकमेलर्स की पतासाजी सहित प्रकरण की विस्तृत जांच के लिए एसपी आदित्य प्रताप सिंह ने एसआईटी गठित की है। 

एसआईटी प्रभारी सीएसपी रीतेश कुमार शिव के नेतृत्व में थाना प्रभारी मदन महल प्रवीण धुर्वे, महिला थाना प्रभारी शशि धुर्वे, उप निरीक्षक कैलाश मिश्रा क्राइम ब्रांच सहित साइबर सेल टीम को जांच में लगाया गया है। पुलिस को संदेह है कि छात्राओं के मोबाइल नंबर संभवत: कॉलेज से ही किसी ने ब्लेक मेलर्स तक पहुंचाए हैं। एक ही कॉलेज में पढने वाली छात्राओं के मोबाइल नंबर का आरोपियों तक पहुंचना सुनियोजित षडयंत्र लग रहा है। कॉलेज के व्हाटसएप ग्रुप में ब्लेकमेलर्स का नंबर कैसे जुड़ा इसकी भी जांच चल रही है।

यह था पूरा मामला-

ब्लैकमेलिंग का शिकार हुई छात्रा ने पुलिस को अपने कथन में बताया कि कुछ दिन पहले उसके मोबाइल पर अश्लील वीडियो आए। वीडियो सीन करते ही वाट्सएप कॉल और बात करने वाले ने खुद को गोरखपुर थाना का सब इंस्पेक्टर होना बताया। कॉल करने वाले ने कहा कि आपके नंबर से अश्लील वीडियो भेजे गए हैं। वीडियो डिलीट कराने सहित कार्रवाई से बचने के लिए रूपए ट्रांसफर कर दो। डर के कारण बताए गए नंबर में 1500 रुपए ट्रांसफर कर दिए गए। सितम्बर माह की शुरूआत में  इस तरह की ब्लैकमेलिंग की चर्चा कॉलेज की अधिकतर छात्राओं की जुबान होने लगी। 5 सितम्बर को 3 छात्राओं ने पुलिस अधिकारियों से मामले की शिकायत की थी।  

पुलिस ने आईपी एड्रेस और यूपीआई नंबर के माध्यम से बैंक खातों की जानकारी जुटाई, लेकिन उक्त जानकारी से आरोपियों तक पहुंचना संभव नहीं है। छात्राओं द्वारा बताए गए मोबाइल नंबरों की प्राथमिक जांच में साइबर सेल को सभी नंबर लगातार बंद मिल रहे हैं। सिम धारक का नाम और ऐड्रेस की पड़ताल की जा रही है। बताया जा रहा है कि आरोपियों की सिम के साथ बैंक में दी गई डिटेल पूरी फर्जी है।

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