आर्य समय संवाददाता जबलपुर।स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान अपनी लेखनी और विचारों से लोगों में जनजागृति फैलाने में सेठ गोविंददास जी का अमूल्य योगदान रहा। आजादी के बाद देवनागरी लिपि और हिंदी को राजभाषा के रूप में स्थापित करने में गोविंददास ने संसद में गंभीरता से अपना पक्ष रखा। जिसे सदन ने माना और आज हिंदी और देवनागरी लिपि हमारी पहचान है। हमें गर्व है कि महाकौशल के लाल गोविंददास जी की कर्मभूमि जबलपुर रही। उक्त बातें बुधवार को शहीद स्मारक गोल बाजार में आयोजित लेखक, साहित्यकार, पत्रकार, समाजसेवी, स्वतंत्रता संग्राम सेनानी और महाकोशल के प्रथम राज्यसभा सांसद पद्मभषण डॉ सेठ गोविंद दास के 129 वें जन्मोत्सव समारोह के दौरान वक्ताओं ने कहीं।
Jabalpur News: भारतीय संस्कृति के संवाहक हैं सेठ गोविंददास, 129 वें जन्मोत्सव पर आयोजित हुए विविध कार्यक्रम
Jabalpur News: Seth Govinddas is the conductor of Indian culture, various programs organized on his 129th birth anniversary.

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