आर्य समय संवाददाता, जबलपुर। महिलाओं के विरूद्ध होने वाले गंभीर अपराध और अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के विरूद्ध दर्ज अपराधों पर त्वरित कार्रवाई सहित लंबित प्रकरणों की विशेष पुलिस महानिदेशक प्रचा ऋचा श्रीवास्तव ने जोन स्तर की समीक्षा करते हुए अधीनस्थ अधिकारियों को कई अहम दिशा-निर्देश दिए हैं।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देश पर पुलिस द्वारा अपराध नियंत्रण के संबंध में की जा रही कार्यवाहियों के सकारात्मक अनुकूल परिणाम परिलिक्षत हुए हैं। अपराध समीक्षा में यह बात सामने आई है कि वर्ष 2023 की तुलना में वर्ष 2024 में 8 माह की अविध में आईपीसी-बीएनएस की धाराओं से संबंधित महिलाओं के विरूद्ध अपराध, बच्चों के विरूद्ध अपराध, अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के विरूद्ध अपराधों में कमी आई है।
पुलिस महानिरीक्षक कार्यालय में जबलपुर जोन में दर्ज महिला संबंधी अपराधों की विशेष पुलिस महानिदेशक प्रज्ञा ऋचा श्रीवास्तव ने समीक्षा करते हुए अधिकारियों से कहा कि महिला संबंधी गंभीर अपराध, बच्चों और अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के विरूद्ध दर्ज अपराधों के प्रति संवेदनशीलता एवं दक्षता से साथ कार्रवाई करें।
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किसी भी कार्रवाई के लिए पीड़िता को थाना या फिर संबंधित अधिकारी के चक्कर न काटना पड़े। महिला संबंधी गंभीर अपराध और अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के विरूद्ध दर्ज अपराधों में ‘जीरो टॉलरेंस की नीति’ अपनाकर त्वरित कार्यवाही की जाए। जानकारी के अनुसार समीक्षा बैठक में यह भी बताया कि गया कि प्रदेश में गैंग रेप/ रेप के प्रकरणों में 19.01 प्रतिशत की कमी आई है, वहीं महिलाओं के विरूद्ध घटित क्रूरता तथा दहेज प्रताड़ना के अपराधों में 3.23 प्रतिशत की कमी आई है।
महिलाओं की सुरक्षा व्यवस्था को प्रभावी बनाने के कारण ही छेड़छाड़ के अपराधों के प्रकरणों में 9.85 प्रतिशत की कमी दृष्टिगत हुई है। इसी प्रकार महिलाओं के विरूद्ध कुल होने वाले अपराधों में 7.91 प्रतिशत की कमी आई है। मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा महिलाओं एवं बच्चों की सहायता व सुरक्षा के लिए चलाए जा रहे विभिन्न कार्यक्र म जैसे ऊर्जा महिला डेस्क,आशा, मुस्कान, मैं हूँ अभिमन्यु जैसे अभियान बेहद कारगर और प्रभावी साबित हुए हैं।
समीक्षा बैठक में स्पेशल डीजी प्रज्ञा ऋचा श्रीवास्तव ने कहा कि नाबालिग की मौखिक या लिखित शिकायत पर पुलिस तत्काल सक्रिय होकर प्रभावी वैद्याानिक कार्रवाई करें। इस तरह के प्रकरणों की किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी। शहरी क्षेत्र के साथ गांव-गांव और कस्बों में महिला सुरक्षा संबंधी जागरूकता अभियान समय-समय पर हों, ताकि महिलाओं को उनके अधिकारों की जानकारी रहे।

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