आर्य समय संवाददाता, जबलपुर। पुलिस कंट्रोल रूम में विश्व मानव तस्करी विरोधी दिवस की कार्यशाला में पहुंचे कलेक्टर दीपक सक्सेना ने मानव तस्करी रोकने के संबंध में जागरूकता बढाने की बात कहते हुए कहा कि ‘मानव तस्करी भयावह अपराध’ इसकी रोकथाम के हरसंभव प्रयास सबको मिलकर करना होगा। मानव तस्करी पीड़ितों और बचे लोगों, उनके दोस्तों, परिवारों और समुदायों पर गहरा प्रभाव डालता है। मानव तस्करी का मुकाबला करने की प्रतिबद्धता में दृढ़ संकल्पि होना चाहिए। एसपी आदित्य प्रताप सिंह ने कहा कि मनाव तस्करी के पीड़ितों के अधिकारों को बढावा देने और उनकी संपूर्ण सुरक्षा देना सबसे अहम है।

मानव तस्करी में किसी व्यक्ति की भर्ती, परिवहन, स्थानांतरण, प्राप्ति, पकड़ कर रखना, छिपाना या शरण देना शामिल है । शोषण के उद्देश्य से किसी व्यक्ति की गतिविधियों पर नियंत्रण, निर्देश या प्रभाव डालना है। आमतौर पर यौन शोषण या जबरन श्रम के लिए, मनाव तस्करी के मामले प्रकाश में आते है। मानव तस्करी की रोकथाम के लिए सशिक्तकरण, संरक्षण, अभियोजन और सबकी भागीदारी प्रबल रूप से होना चाहिए। 30 जुलाई को विश्व मानव तस्करी विरोधी दिवस इसलिए मनाया जाता है, ताकि यह एक राष्ट्रीय जन जागरूकता अभियान बन सके। आमजन के साथ कानून प्रवर्तन एजेंसियों और अन्य उद्योग भागीदारों को मानव तस्करी के संकेतकों को पहचानने तथा संभावित मामलों पर उचित तरीके से प्रतिक्रि या के लिए प्रतिवर्ष जागरूकता अभियान चलाया जाता है।

मानव तस्करी के लिए सबसे कमजोर कौन-

मानव तस्कर आर्थिक रूप से कमज़ोर लोगों को भी अपना शिकार बनाते हैं, जैसे कि गरीबी में रहने वाले, बेरोज़गार या बेघर लोग। भोजन, आश्रय या स्वास्थ्य सेवा जैसी बुनियादी ज़रूरतों को पूरा करने में असमर्थ इन व्यक्तियों को श्रम या सेक्स के बदले में उनकी बुनियादी ज़रूरतों को पूरा करने के प्रस्तावों के साथ निशाना बनाया जाता है। कुछ सामान्य कारक स्थानीय परिस्थितियां हैं जो आबादी को बेहतर परिस्थितियों की तलाश में पलायन करने के लिए प्रेरित करती हैं। कई स्थानों में पीढ़ियों से बंधुआ मजदूरी जारी है, जिसके तहत तस्कर मृतक श्रमिकों के बकाया कर्ज को उनके माता-पिता, भाई-बहनों या बच्चों पर डाल देते हैं।