आर्य समय संवाददाता,जबलपुर। कांग्रेस की छात्र ईकाई भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन (एनएसयूआई) के प्रदेश कार्यालय से जारी हुए एक पोस्टर को लेकर जबलपुर में विवाद खड़ा हो गया है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक (आरएसएस) पर प्रतिबंध की मांग वाले पोस्टरों को चस्पा करने के जबलपुर क्राइम ब्रांच पुलिस ने एनएसयूआई कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया है। जिसके बाद कांग्रेस नेताओं ने गिरफ्तारी का विरोध करते हुए पुलिस थाना सिविल लाइन में जमकर हंगामा मचाया। शनिवार की शाम 8 बजे से शुरू हुआ विवाद देररात तीन बजे तक चलता रहा। थाना कैंपस में कांग्रेस कार्यकर्ताओं और अधिवक्ता एसोसिएशन से जुड़े पदाधिकारियों की बढ़ती भीड़ को देखते हुए रात तीन बजे गिरफ्तार किए गए एनएसयूआई कार्यकर्ताओं को पुलिस ने छोड़ दिया।  

जानकारी के मुताबिक रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय (rdvv) प्रशासन ने शनिवार को सिविल लाइन थाना में सीसीटीवी फुटेज के साथ शिकायत दर्ज करायी थी। जिसमें बताया गया था कि कुछ युवकों द्वारा विश्वविद्यालय कैंपस आरएसएस विरोधी पोस्टर चस्पा किए गए हैं। विश्वविद्यालय प्रशासन की शिकायत पर पुलिस ने संज्ञान लेते हुए सीसीटीवी फुटेज में दिख रहे युवकों की पहचान एनएसयूआई पदाधिकारी अमित मिश्रा, नीलेश महार व अन्य के रूप में करते हुए गिरफ्तारी के प्रयास शुरू कर दिए।

मामला आरएसएस से जुड़ा होने के चलते पुलिस की क्राइम ब्रांच बिंग को एक्टिव किया गया। क्राइम ब्रांच ने दोनों एनएसयूआई पदाधिकारियों को गिरफ्तार किया और सिविल लाइन पुलिस के हवाले कर दिया। रात 8 बजे हुई गिरफ्तारी की सूचना जैसे ही कांग्रेस नेताओं व एनएसयूआई कार्यकर्ताओं व अन्य छात्र संगठनों को लगी तो उनका जमघट सिविल लाइन थाना में लगना शुरू हो गया।

चुंकि मामला जमानती धाराओं में दर्ज था और पकडेÞ गए एनएसयूआई पदाधिकारी अधिवक्ता भी है। लिहाजा उन्हें तत्काल जमानत पर छोड़ने की मांग होने लगी। लेकिन पुलिस अधिकारी इस बात के लिए तैयार नहीं थे। जिसके बाद रात 1 बजे विधायक लखन घनघोरिया भी सिविल लाइन थाना जा पहुंचे। पुलिस अधिकारियों से चली लंबी चर्चा के बाद भी जब उन्हें कोई रास्ता निकलता नहीं दिखा तो कांग्रेस नेता धरने पर बैठ गए।

बताया जाता है कि रात तीन बजे तक चले हंगामें के बाद पुलिस ने गिरफ्तार किए गए दोनों पदाधिकारियों को छोड़ दिया। एनएसयूआई जिला अध्यक्ष सचिन रजक का कहना था कि जितनी तत्परता से सीसीटीवी फुटेज मुहैया करने में आरडीयू प्रशासन ने इस मामले में दिखाई उतनी ही तत्परता महिला अधिकारी के मामले में दिखाई होती तो आज छेड़छाड़ करने वाले आरोपी जेल में होते।