आर्य समय संवाददाता, जबलपुर। आर्य समाज जबलपुर के वार्षिकोत्सव पर शुक्रवार की रात 8 बजे धर्मसभा का आयोजन हुआ। आर्य समाज के संत सच्चिदानंद महाराज ने धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहा- सदियों की गुलामी के कारण विधर्मियों व कम्युनिस्टों ने देश के सनातन वेदों व संस्कृति के साथ छेड़छाड़ कर हमारे मूल को समाप्त करने का षड्यंत्र रचा। हम भी उन विधर्मियों के षडयंत्रों के जाल में फंस गए। नालंदा जैसे कई विश्वविद्यालय में सनातन व देश के मूल ग्रंथों को नष्ट कर दिया गया। आचार्य शिक्षार्थियों की गर्दनें काट दी गई। समाज को जातियों में बांटने का काम विधर्मियों ने किया है। आज जातिगत संघर्ष के कारण हमारी राष्ट्रीय एकता संकट में है। अनेकता में एकता नहीं हो सकती। एकता से ही एकता हो सकती है। लव जिहाद, लैंड जिहाद जैसे कई मिशन विधर्मी चला रहे हैं व हिंदुओं को तोड़ने का काम कर रहे हैं। ईसाई मिशनरियां सेवा के नाम पर धर्म परिवर्तन करवाकर हमारे भोलेभाले गरीबों को धर्मांतरित कर रहे है। हमें हम सभी सनातनी है दलित व वंचित लोगों को साथ में लेकर चलना होगा, तभी धर्म बचेगा। अब हमारे मूल धर्म व वेदों की ओर लौटना होगा। उन्होंने कहा ऋषि दयानंद सरस्वती ने पाखंड के खिलाफ काम किया है। देश के लिए हजारों लाखों आर्यों ने बलिदान दिया है। हमारे देश का नाम आर्यावर्त था, बाद में इसे हम भारत कहने लगे। अंग्रेजों ने इसे इंडिया कर दिया। इस मौके पर बड़ी संख्या में नगरवासी मौजूद थे।
उन्होंने कहा भगवान श्री कृष्ण, भगवान राम जैसे महापुरुष के चरित्र को बिगाड़ा गया। भगवान श्रीकृष्ण को चोर, छलिया व चूड़ी बेचने वाला बता दिया। भगवान शिव को गांजा-भांग पीने वाला बता दिया। जबकि इनका जीवन राष्ट्र के लिए समर्पित था। जैन, बौद्ध या हिंदू हम सभी सनातनी है।
इस धर्म सभा का संचालन पुरोहित - आचार्य धीरेन्द्र पाण्डेय ने किया साध्वी आत्मनिष्ठा जी, आचार्य आयुष शर्मा, आचार्य विजय जी डां. अरुण सिंह,श्री देवेन्द्र माहेश्वरी, पीयूष शर्मा, राजकुमार मेहता,नरेन्द्र धमीजा, श्रीमती एकता कोचर, श्रीमती सरोजिनी कौशल, श्रीमती सुदेश धमीजा, श्रीमती गीता वासुदेव, सोमेन्द्र माहेश्वरी, अतुल साहू, रोहित माटा आदि सैकड़ों गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

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