आर्य समय संवाददाता, जबलपुर। ब्रिटिश काल के भारतीय दंड संहिता, अपराध की प्रक्रिया संहिता और 1872 के भारतीय साक्ष्य अधिनियम के प्रचलित धाराओं के कोड आज 30 जून की रात 12 बजे निष्क्रिय हो जाएंगे। केंद्र सरकार की ओर से अधिसूचित नए कानून कोड आपराधिक न्याय प्रणाली को पूरी तरह से बदल दिया गया है। रात 12 बजे के बाद से नई संहिता के प्रावधान के तहत धारा के नए कोड का एफआईआर में उल्लेख होगा। नए कानून का खास मकसद विभिन्न अपराधों को परिभाषित कर उनके लिए सजा तय करके देश में आपराधिक न्याय सिस्टम को पूरी लोक प्रशांति विरूद्ध अपराध सहित सैकड़ों धाराओं के चर्चित कोड आज रात से बदल जाएंगे। नए कानून में हत्या की धारा 103 होगी और धारा 302 छिनौती के मामले में लगेगी। जिले के सभी 36 पुलिस थाना, 1 महिला थाना, 1 अजाक थाना और 3 ट्रेफिक थानों में नए कोड के हिसाब से ही पुलिस रोजनामचा में एफआईआर दर्ज करते हुए धारा/ उपधारा का उल्लेख करेगी। आईपीसी कानून में 511 धाराएं थीं, नए अपराध, अपहरण, लोक सेवक के विरूद्ध अपराध, निर्धारित कानून में संभवतः 358 धाराएं हैं।
भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) में हत्या, धोखाधड़ी, डकैती, चोरी, महिला संबंधी
सीआरपीसी में 484 धाराएं थीं, वह नए नियम में 531 धाराएं होंगी। इसमें 177 धाराओं को बदला गया है और 9 नई धाराएं जोड़ी गई हैं। नए कानून को लाते हुए 14 धाराएं समाप्त भी की गई हैं।
डकैती -धारा 395 ,धारा 310(2)
मानहानि -धारा 499 ,धारा-354
रेप- धारा 376 ,धारा-64
कुछ धाराओं की व्याख्या भी बदली
नए कानूनों में नाबालिग से दुष्कर्म करने के दोषियों को अब फांसी की सजा दी जा सकेगी। गैंगरेप के मामलों में 20 साल की कैद या आजीवन कारावास की सजा का प्रावधान किया गया है। इसके अलावा नाबालिग के साथ गैंगरेप को नए अपराध की श्रेणी में रखा गया है। 5 या इससे ज्यादा लोगों का एक समूह मिलकर जाति या समुदाय आदि के आधार पर हत्या करता है, तो ग्रुप के हर सदस्य को आजीवन कारावास की सजा का प्रावधान रखा गया है।
नए कानून में हटाई गईं धाराएं
भारतीय न्याय संहिता में 124ए राजद्रोह, 309 आत्महत्या का प्रयास, 377 अप्राकृतिक रूप से संभोग करना, 310 ठग, 311 ठग हेतु दंड और 497 व्यभिचार से संबंधित धाराओं को हटाया गया है।

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