छत्तीसगढ़ में अब बाघों की संख्या पर से रहस्य का पर्दा उठ चुका है... प्रदेश में बाघों की संख्या बढ़ने की जगह घट गई है... अब प्रदेश में सिर्फ 17 बाघ ही रह गए हैं... इसका खुलासा केंद्र सरकार के बाघ गणना 2022 के राज्यवार आंकड़ों से हुआ... इन आंकड़ों के मुताबिक देश में जहां बाघों की संख्या में पिछली गणना की तुलना में वृद्धि हुई है... वहीं प्रदेश में बाघ कम हुए हैं जबकि राज्य सरकार लगातार बाघों की संख्या बढ़ाने की कोशिश कर रही है... प्रदेश के तीन टाइगर रिजर्व अचानकमार, उदंती और इंद्रावती में हर साल 60 करोड़ से अधिक राशि खर्च की जाती है... 2014 से अब तक तीनों टाइगर रिजर्व में लगभग 500 करोड़ की राशि खर्च की जा चुकी है... इसके बाद भी लगातार बाघों की संख्या घट रही है... जबकि 2014 में एनटीसीए के मुताबिक बाघों की संख्या प्रदेश में 46 थी... जो लगातार घटते हुए 2023 में महज 17 तक पहुंच गई है... इसे लेकर सियासत भी कम नहीं हो रही है... बीजेपी जहां बाघों की संख्या घटने के लिए राज्य सरकार को दोषी ठहरा रही है... प्रदेश में बाघों का संरक्षण नहीं हो पाने की बात कह रही है... वहीं मुख्यमंत्री भूपेश बघेल कहते हैं कि राज्य सरकार लगातार बाघों के संरक्षण की दिशा में काम कर रही है...देश में जहां बाघों की संख्या में वृद्धि हुई है... वहीं छत्तीसगढ़ मे बाघों की लगातार घटती संख्या चिंता बढ़ाने वाली है... इससे पर्यटन की संभावनाओं पर ताे असर पड़ता ही है... जैव विविधता की दृष्टि से भी बाघों का घटना चिंताजनक है... ऐसे में यही उम्मीद की जा सकती है कि बाघों की संख्या बढ़ाने के लिए सिर्फ वादे या दावे नहीं, ठोस पहल की जाए.
छत्तीसगढ़ में आखिर क्यों घटी बाघों की संख्या ?

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