आर्य समय संवाददाता,जबलपुर। 2024 के अंत तक देश के सभी 62 केंटोनमेंट बोर्ड के सिविल एरिया को समीपस्थ निकाय के हवाले कर दिया जाएगा। देश में नई सरकार के गठन के बाद एक बार फिर विलय की प्रक्रिया में तेजी आ गई है। रक्षा मंत्रालय अब उक्त प्रक्रिया को जल्द से जल्द निपटा लेना चाहता है। यही कारण है कि अब जो भी दिशा-निर्देश जारी किए जा रहे हैं। वह सभी केंट बोर्ड के लिए जारी हो रहे हैं,ताकी विलय को लेकर कहीं भी कोई भ्रम की स्थिति न बने। सिविल एरिया स्थानीय निकाय में मिलने के बाद लोग राज्य सरकार की सारी सुविधाओं का लाभ उठा पाएंगे। वहीं मकान के नक्शों समेत बिजली-पानी के कनेक्शन लेने में भी आसानी होगी। हालांकी भूमि का स्वामित्व भारत सरकार के पास ही सुरक्षित होगा।
विलय की प्रक्रिया को तेज करने के लिए रक्षा सचिव ने गत 25 जून को एक बैठक बुलाई थी। जिसके बाद उपमहानिदेशक (कैंट) ने 27 जून को पत्र लिखकर सभी प्रधान निदेशक के तहत डिफेंस इस्टेट को दिशा-निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने सिविल क्षेत्रों को प्रदेश के नगर निकायों में मिलाने के लिए सभी औपचारिकताएं जल्द से जल्द पूरी करने को कहा है। बता दें कि केंट बोर्ड से सिविल क्षेत्रों को बाहर करने की मांग लंबे समय से चल रही है। इस प्रक्रिया से छावनी में रह रहे लाखों लोगों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद जाग गई है। अब देश की 61 छावनियों के सिविल क्षेत्र को बाहर निकाले के लिए अब अंतिम प्रक्रिया समझा जा रहा है।
प्रथम चरण में करीब 63 केंट बोर्ड के सिविल एरिया के विलय की प्रक्रिया अंतिम चरण में चल रही है। जिसमें मध्यप्रदेश के सागर, महू और मोरार केंट बोर्ड भी शामिल है। ऐसी उम्मीद है कि जल्द ही जबलपुर, पचमढ़ी सहित देश के अन्य केंट बोर्ड के मामले में भी कमेटियां गठित हो जाएगी।
बंगले,बगीचों पर अंतिम निर्णय आर्मी स्टेशन ही लेगा--
मुख्यालय से जारी हुए पत्रों में सबसे महत्वपूर्ण बात यह कि सिविल एरिया का विलय होने के बाद शेष आर्मी स्टेशन के अंर्तगत आने वाली भूमियों पर सेना ही अंतिम निर्णय लेगी। पत्र में उल्लेखित है कि आर्मी अपनी सुरक्षा को प्राथमिकता में रखते हुए जो निर्णय लेगी उसे मान्य किया जाएगा। इससे यह बात साफ हो गई कि बंगले,बगीचों की जमीनों पर अवैध रूप से कब्जा कर मकान बना रह रहे लोगो पर बेदखली की तलवार लटक रही है। पिछले कुछ माहों में देंखे तो आर्मी सेंटर से लगी कृषि भूमि में अवैध कब्जों को लेकर नोटिस दिए जाने व अतिक्रमण हटाने के मामले में तेजी आयी है। अब तो आर्मी क्यूआरटी भी अतिकमणों को लेकर सख्ती से कार्रवाई कर रही है।

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