आर्य समय संवाददाता जबलपुर आयुध निर्माणी खमरिया (ओएफके) में मैंगो प्रोजेक्ट के तहत बमों का उत्पादन शुरू करने को लेकर जल्द ही हरी झंडी मिलने की उम्मीद जागी है। सोमवार को म्यूनिशंस इंडिया लिमिटेड (एमआईएल) के सीएमडी दिपांकर बैनर्जी ओएफके पहुंच रहे हैं। विभाग मैंगों प्रोजेक्ट में सहयोगी निर्माणियां भंडारा व एक अन्य निर्माणी के महाप्रबंधक भी जबलपुर पहुंच रहे हैं। जिसके बाद ओएफके में हलचल तेज हो गई है। दरअसल, मैंगो प्रोजेक्ट को लेकर आवश्यक तैयारियां पूरी हो गई थी,लेकिन उत्पादन प्रारंभ नहीं हो पा रहा था। लेकिन अब ऐसा माना जा रहा है कि सीएमडी उत्पादन को लेकर कुछ बड़ा ऐलान करने आ रहे हैं।

उल्लेखनीय है कि रूस के साथ टीओटी (ट्रांसफर आफ टेक्नालाजी) करार के तहत 125 एमएम एफएसएपीडीएस एंटी टैंक बमों का ओएफके में उत्पादन की तैयारियां बीते कुछ वर्षो से चल रही थीं। उक्त प्रोजेक्ट मैंगों नाम दिया गया था। प्रोजेक्ट के तहत ही रूसी विशेषज्ञों के मार्गदर्शन में ओएफके में इमारत का निर्माण कराया गया था।  

दरअसल,मैंगो प्रोजेक्ट के तहत जो बम बनाए जाने हैं उनके प्रत्येक चरण का काम अलग-अलग तापमान में होता है। उस तापमान को मेंटेन रखने एक विशेष तकनीक से तैयार बिल्डिंग ही उपयुक्त होती है। ओएफके को मैंगो प्रोजेक्ट के शुरू होने से बड़ी उम्मीदें हैं।

एक अनुमान के मुताबिक इस काम के प्रारंभ होने से निर्माणी को औसतन सात से आठ सौ करोड़ रुपये का काम अतिरिक्त मिलने लगेगा। इसके साथ ही निर्माणी के कामगारों को ओवरटाइम की सुविधा भी सहज मिलने लगेगी।

काफी घातक है 125 एमएम बम -
सेना के जवान टी-72 एम-1 टैंक से निशाना साधकर 125 मिमी एफएसएपीडीएस बम को चलाते हैं। यह बम दो हिस्सों में बना होने की वजह से इसका पहला हिस्सा तेज गति से दुश्मनों के टैंक से टकराकर उसकी मोटी चादर को भेदता है और टैंक कं अंदर पहुंचते ही बम का दूसरा हिस्सा जबर्दस्त विस्फोट कर टैंक के परखच्चे उड़ा देता है।