मध्य प्रदेश में डॉ. मोहन यादव की सरकार बनने के 12 दिन बाद सोमवार को कैबिनेट का विस्तार किया गया. 28 विधायकों को मंत्री बनाया गया है, इनमें से 18 विधायकों को कैबिनेट, 6 विधायक राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार और 4 को राज्यमंत्री बनाया है. लेकिन सबसे ज्यादा हैरान करने वाली बात ये रही कि सीएम और एक डिप्टी सीएम के मालवा-निमाड़ से होने के बावजूद मंत्रिमंडल में इस क्षेत्र से कम विधायकों को मंत्री पद मिला मिला है. ये संख्या पूर्व सीएम शिवराज सिंह चौहान और कमलनाथ मंत्रिमंडल से भी कम है.
पांच साल पहले 2018 में कमलनाथ सरकार में कांग्रेस ने मालवा निमाड़ के सबसे ज्यादा 9 विधायकों को मंत्री बनाया था. जब कांग्रेस सरकार गिरी और 2020 में फिर से बीजेपी की सत्ता में वापसी हुई तो शिवराज सरकार में मालवा निमाड़ के 8 विधायकों को मंत्री पद दिया गया. लेकिन इस बार मोहन सरकार में 7 विधायकों को ही मंत्री बनाया गया है.
बीजेपी की मोहन यादव सरकार में इस बार मालवा-निमाड़ से 7 विधायकों को मंत्री बनाया गया है. मालवा-निमाड़ के इंदौर लोकसभा से कैलाश विजयवर्गीय और तुलसी सिलावट, शाजापुर लोकसभा के शुजालपुर से इंदर सिंह परमार, खंडवा लोकसभा के हरसूद से विजय शाह, रतलाम-झाबुआ के पेटलावाद से निर्मला भूरिया, अलीराजपुर से नागर सिंह चौहान और रतलाम से चैतन्य कश्यप को मंत्री पद दिया गया है.
2018 में जब कमलनाथ की सरकार बनी थी तब सबसे ज्यादा मंत्री मालवा निमाड़ से बनाए गए थे। कमलनाथ सरकार में खरगोन लोकसभा के महेश्वार से विजय लक्ष्मी साधो, कसरावद से सचिन यादव और राजपुर से बाला बच्चन, देवास लोकसभा के सोनकच्छ से सज्जन सिंह वर्मा, शाजापुर लोकसभा से हुकुम सिंह कराड़ा, इंदौर लोकसभा के सांवेर से तुलसी राम सिलावट और राऊ से जीतू पटवारी, धार लोकसभा के गंधवानी से उमंग सिंघार और कुक्षी से सुरेंद्र सिंह बघेल को मंत्री बनाया गया था।
मोहन सरकार के मंत्री मंडल विस्तार में बीजेपी ने इस बार मालवा निमाड़ के 3 विधायकों का मंत्री पद काटा है. जिसमें उषा ठाकुर, ओम प्रकाश सकलेचा और हरदीप सिंह डंग शामिल हैं.

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