आर्य समय संवाददाता,जबलपुर। अब कैंट बोर्ड द्वारा सार्वजनिक बाजारों की दुकानों में आरक्षण व्यवस्था लागू करने जा रहा है। कैंट बोर्ड ने इस मामले में सूचना जारी करते हुए स्थानीय लोगों से दावे आपत्तियां आमंत्रित की है। बताया जाता है आरक्षण को लेकर पूरा मसौदा रक्षा मंत्रालय से तैयार होकर आया है।
जिसे चरणबद्ध लागू किया जाना है। इस पॉलिसी को लेकर अभी से चर्चाएं भी शुरू हो गई है। मुख्य रूप से व्यापारी इस बात की पतासाजी कर रहे हैं कि वर्तमान में दुकानें संचालित करने वाले तो कहीं इससे प्रभावित नहीं होंगे। हालांकि बोर्ड के अधिकारियों का कहना है कि आरक्षण भविष्य में किराए पर दी जाने वाले मार्केट की दुकानों पर प्रभावी होगा।
जानकारी के मुताबिक केंद्र सरकार द्वारा कैंट एक्ट 2006 (2006 का 41) की धारा 346 की उपधारा (2) के खंड (ड) के साथ पठित धारा 267 द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए का.नि.आ. 9 (अ) 10 जून 2026 को कैंट बोर्डों द्वारा सार्वजनिक बाजारों में दुकानों के आरक्षण संबंधी प्रारूप नियम 2026 प्रकाशित किया गया है।
जिसके तहत कैंट बोर्ड के मार्केट की 25 फीसदी दुकानें आर्मी के भूतपूर्व सौनिक या फिर शहीद सैनिक की पत्नी के लिए आरक्षित रहगी। शेष दुकानों के आवंटन की प्रक्रिया समीवर्ती निकायों में प्रचलित नियम व आरक्षण के तहत आवंटित की जाएंगी। कैंट बोर्ड के राजस्व का बड़ा हिस्सा सावर्जनिक मार्केट की दुकानों से आने वाले किराए से आता है।
कम से कम दो बार मंगाने होंगे आफर -
वर्तमान में कैंट बोर्ड अपने मार्केट की दुकानों का न्युनतम किराया निर्धारित करते हुए उच्चत्तम बोली आमंत्रित करता है। लेकिन आरक्षण लागू होने के बाद संबंधित श्रेणी की दुकानों के लिए पात्र आवेदकों के नहीं आने की स्थिति में कम से कम दो बार नीलामी प्रक्रिया को करना होगा। जब दो बार प्रक्रिया होने के बाद भी आरक्षण श्रेणी में दुकान का आवंटन नही हो पाता है तब उसे सामान्य श्रेणी में शामिल करते हुए खुली बोली लगवाई जाएगी।
पॉलिसी को लेकर दावे आपत्तियां मंगाई गई -
कैंट बोर्ड द्वारा सार्वजनिक बाजारों में दुकानों के आरक्षण संबंधी प्रारूप नियम 2026 को लेकर 18 जून को सूचना जारी की गई है। जिसमें आम नागरिकों - व्यापारियों से पॉलिसी को लेकर किसी प्रकारके दावे-आपत्तियां मंगाई गई है। सूचना जारी होने के 30 दिनों के अंदर नागरिकों को अपनी बात रखनी होगी।

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